Fire Safety Engineer Me Career Kaise Banaye: Salary, Age, Course Fee, Scope

Fire Safety Engineer Me Career Kaise Banaye: फ़ायर सेफ़्टी में करियर कैसे बनाए

Fire Safety Engineer me Career Kaise Banaye: क्या होता है फायर फाइटिंग, आपने यह कहावत अक्सर सुनी होगी कि आग से मत खेलो, नहीं तो जल जाओगे। लेकिन यह कोई दावा नहीं कर सकता कि आग लगेगी ही नहीं।

अगर आग नहीं लगती है तो कोई संकट नहीं आता, लेकिन किसी भी कारण से अगर आग लग जाती है तो ऐसे व्यक्तियों की जरूरत पड़ती है जो आग की किस्म, आग लगने के कारण, आग बुझाने के तरीके, आग बुझाने के उपकरण, और आग में घिरे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में कुशल हों।

स्वाभाविक है कि यह कोई ऐसा कार्य नहीं है, जिसकी जानकारी हर एक को हो। इसके लिए विशेष शिक्षा और विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। यदि आप में आग से खेलते हुये कैरियर की बुलंदी पर पहुँचने का हौसला है, तो इस कैरियर में अपार संभावनाएं हैं।

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Fire Safety Engineer me Career Kaise Banaye

क्या करना होता है फायर फाइटिंग (Fire Safety Engineer) में कैरियर बनाने के लिए फायर फाइटिंग में डिप्लोमा और स्नातक कोर्स उपलब्ध हैं। फायर फाइटिंग के क्षेत्र में उपयुक्त डिग्री और प्रशिक्षण के उपरांत आप निम्नांकित पदों पर सेवाएँ दे सकते हैं

Job Profile in Fire Safety Engineering

फायर मैन: फायरमैन वह व्यक्ति होता है जो सीधे सीधे आग से जूझता है। हर फायर स्टेशन पर प्रशिक्षित फायर मैनों की एक टीम नियुक्त होती है।


लीडिंग फायरमैन: फायरमैन बनने के बाद, विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद लीडिंग फ़ायरमैन बन सकते हैं।


स्टेशन ऑफिसर:
किसी भी फायर स्टेशन का प्रमुख अधिकारी स्टेशन ऑफिसर होता है जो न केवल फायर स्टेशन का नेतृत्व करता है, बल्कि इस बात की पूरी जानकारी रखता है कि उसके स्टेशन के दायरे में आने वाले क्षेत्र में किस तरह की इमारतें, फैक्ट्रियाँ, रिहाइशी इलाके हैं, जहां आग लगने की संभावना हो सकती है।


सब ऑफिसर: किसी भी फायर फाइटिंग टीम का नेतृत्व एक सब ऑफिसर करता है। इसकी कमान में फायर मैन और लीडिंग फायर मैन होते हैं। यह परिस्थिति का आंकलन कर अपनी टीम का मार्गदर्शन करता है कि किस प्रकार से कम से कम नुकसान के साथ आग बुझाने का कार्य पूरा किया जाए।


सहायक डिवीज़नल ऑफिसर: प्रशासनिक दृष्टि से पूरे राज्य को अलग अलग डिवीजनों में बांटा जाता है और प्रत्येक डिवीजन की ज़िम्मेदारी एक सहायक डिवीज़नल ऑफिसर की होती है

जो कार्य के विस्तार और क्षेत्र के अनुसार एक या अधिक हो सकते हैं। इलाके में बनने वाली इमारतों में आग बुझाने के लिए उपयुक्त इंतजाम सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी सहायक डिवीजन ऑफिसर की होती है।


डिवीज़नल ऑफिसर: डिवीज़नल ऑफिसर की ज़िम्मेदारी भी लगभग वही होती है जो सहायक डिवीज़नल ऑफिसर की होती है। कम से कम तीन सहायक डिवीज़नल ऑफिसर के ऊपर एक डिवीज़नल ऑफिसर होता है। इसका मुख्य कार्य सहायक डिवीज़नल ऑफिसरों को क्षेत्रानुसार कार्य बाँट कर उनके कार्यों का निरीक्षण करना होता है।


डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर: डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर पूरे फायर डिपो के समन्वय , कार्य, क्षेत्र विभाजन और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ यह सुनिश्चित करता है कि पूरा फायर विभाग हर परिस्थिति से निपटने में सक्षम हो। इसके अतिरिक्त, यह सहायक डिवीज़नल ऑफिसर और डिवीजन ऑफिसर के कार्यों का निरीक्षण भी करता है।


चीफ फायर ऑफिसर: पूरे फायर विभाग का मुख्य कार्याधिकारी चीफ फायर ऑफिसर होता है। इसकी निगरानी, निर्देश, समन्वय और प्रेरणा से विभाग संचालित होता है। पूरे राज्य में आग लाग्ने की घटनाएँ कम से कम हों और आग लगने पर उससे किस तरह पूरी तैयारी के साथ निपटना है यह चीफ़ फायर ऑफिसर के कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है।


Fire Safety Me Kaisa Hota Hai Kaam । कैसा होता है कार्य का स्वरूप

Fire Safety Engineer me Career Kaise Banaye
Fire Safety Engineer me Career Kaise Banaye


फायर फाइटर्स का मुख्य कार्य आग लगने के कारणों का पता लगाना, उसका विश्लेषण करना और रोकथाम करना होता है। फायर फाइटिंग मुख्यतः इलेक्ट्रिकल से जुड़ा हुआ क्षेत्र है।

इसमें विद्युत यंत्रों की तकनीकी जानकारी, स्प्रिंकल एलार्म, पानी की बौछार का सबसे सटीक और कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा जान-माल की रक्षा करना प्रमुख उद्देश्य होता है। इसलिए फायर विभाग से जुड़ना एक सफल कैरियर के साथ साथ जन सेवा भी होता है।


Education Qualification: फायर फाइटिंग के लिए क्या है जरूरी शैक्षणिक योग्यता


फायर फाइटिंग ( Fire Safety Engineer ) के क्षेत्र में सफल होने के लिए जितनी जरूरत शैक्षणिक योग्यता की होती है उतनी ही अधिक जरूरत व्यक्तिगत योग्यता की भी होती है। अगर बारूद से भरे कारखाने में आग लगती है, या केमिकल फैक्ट्री में आग लगती है, या जंगल में आग लगती है,

तो इसका सामना करने, किसी बड़ी दुर्घटना को टालने और जान माल की न्यूनतम क्षति सुनिश्चित करने के लिए धैर्य, साहस ले साथ नेतृत्व गुण, तत्काल निर्णय लेने की क्षमता बहुत काम आती है। फायर फाइटिंग से संबन्धित डिप्लोमा या डिग्री कोर्स में प्रवेश के लिए 12वीं पास होना अनिवार्य है।

कुछ पदों के लिए बीई (फायर) की डिग्री अनिवार्य होती है। इसमें प्रवेश के लिए अखिल भारतीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। इसकी प्रवेश परीक्षा के लिए गणित, रसायन एवं भौतिकी के साथ 12वीं कक्षा कम से कम 50 अंकोंके साथ उत्तीर्ण होना आवश्यक है।


Physical Standards: फायर फाइटिंग के लिए क्या हैं शारीरिक मानदंड


फायर फाइटिंग (Fire Safety Engineer) के क्षेत्र में कैरियर बनाने के लिए शैक्षणिक योग्यता के साथ साथ, शारीरिक मानदंड भी आवश्यक हैं। इसमें, पुरुषों के लिए लंबाई कम से कम 165 सेमी, वजन 50 किग्रा, तथा महिलाओं के लिए लंबाई 157 सेमी तथा वजन 46 किग्रा होना आवश्यक है। दृष्टि 6/6 तथा आयु सीमा 19 से 23 वर्ष के बीच होना आवश्यक है। आयु सीमा में नियमानुसार छूट भी दी जाती है।


Career Scope in Fire Safety Engineer: तेजी से बढ़ रहे रोजगार के अवसर


Career Scope in Fire Safety Engineer: आज से कुछ समय पूर्व फायर स्टेशन केवल महानगरों में ही होते थे, लेकिन हाल के वर्षों में देश के प्रत्येक जिले में फायर स्टेशन खोले जा रहे हैं। जिस प्रकार से देश की जनसंख्या बढ़ रही है, उसके अनुसार, फायर स्टेशनों की संख्या में वृद्धि होनी स्वाभाविक है।

इसके अलावा, सभी सरकारी तथा गैर सरकारी कार्यालयों में फायर इंजीनियर की नियुक्ति अनिवार्य कर डीए गई है। फायर इंजीनियर की अग्निशमन विभाग के अतिरिक्त, आर्किटेक्चर और भवन निर्माण, रिफाइनरी, गैस फैक्ट्री, निर्माण उद्योग, प्लास्टिक एलपीजी तथा केमिकल प्लांट, बहुमंज़िली इमारतों, एयरपोर्ट हर जगह ख़ासी मांग है। \


Fire Safety Engineer Course: कौन कौन से कोर्स हैं उपलब्ध


Courses: फायर फाइटिंग से संबन्धित कोर्सों की अवधि 6 माह से 3 वर्ष तक की है। इसमें कुछ प्रमुख कोर्स डिप्लोमा इन फायर फाइटिंग, पीजी डिप्लोमा इन फायर एंड सेफ़्टी इंजीनियरिंग, बीएससी इन फायर इंजीनियरिंग, फायर टेक्नोलोजी एंड इंडस्ट्रियल सेफ़्टी मैनेजमेंट, इंडस्ट्रियल सेफ़्टी सुपरवाइज़र, रेसक्यू एंड फायर फाइटिंग हैं।

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