मुखिया का चुनाव कैसे होता है ? मुखिया के कार्यों एवं अधिकारों के बारे में यहां जानिए।

मुखिया का चुनाव कैसे होता है भारत की अधिकांश जनसंख्या गाँवों में रहती है और यही कारण है कि भारत को गाँवों का देश भी कहा जाता है। जब भी कभी हम ग्रामीण भारत की स्थानीय स्वशासन की प्रणाली के विषय में पढ़ते, देखते अथवा सुनते हैं तो एक नाम हमे प्रमुख रूप से सुनने को मिलता है और वो नाम है गाँव के मुखिया का। आज हम चर्चा करेंगे कि किसी भी ग्राम पंचायत में मुखिया का चुनाव कैसे होता है तथा मुखिया के कौन कौन से अधिकार होते हैं। परंतु इन सभी बातों को जानने से पहले हमें पंचायती राज व्यवस्था के स्वरूप को समझना होगा।

सर्वप्रथम हम ये जानेंगे कि पंचायती राज व्यवस्था क्या है ?

पंचायती राज व्यवस्था भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने वाले स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था को कहते हैं। इसके द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन का संचालन होता है। भरतीय संविधान के 73वें संशोधन के साथ अधिनियम 1992 के माध्यम से पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्ज़ा प्राप्त हुआ। पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत तीन प्रकार की संस्थाएं कार्य करती है। ये संथाएं निम्लिखित हैं –

1. ग्रामीण स्तर पर ग्राम पंचायत

2. ब्लॉक (प्रखंड) स्तर पर पंचायत समिति

3. जिला स्तर पर पंचायत समिति

इन संस्थाओं के अंतर्गत राज्य सरकार के द्वारा स्थानीय स्तर पर चुनाव कराए जाते हैं तथा स्थानीय जनता द्वारा उस पंचायत के प्रमुख तथा अन्य पार्षद सदस्यों का चुनाव किया जाता है। इन प्रतिनिधियों द्वारा अपने पंचायत क्षेत्र में विकास के कार्यों के साथ साथ अन्य कई कार्य किए जाते हैं।

यदि हम किसी ग्राम पंचायत में मुखिया के चुनाव की बात करे कि उनका चुनाव कैसे होता है इसके लिए सबसे पहले हमें ग्राम सभा तथा ग्राम पंचायत के स्वरूप को समझना होगा।

ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत

ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत एक ही सिक्के के दो पहलुओं के समान हैं। जहाँ एक ओर ग्राम सभा का निर्माण एक या एक से अधिक गाँवों के वैसे लोगो के समूह द्वारा किया जाता है जो कि 18 वर्ष या उससे अधिक के होते हैं तथा चुनाव में मतदान करने योग्य होते हैं। आसान शब्दों में कहे तो ग्राम सभा उस ग्राम के वैसे नागरिकों का समूह है जो चुनाव में मतदान करने के अधिकारी होते हैं। किसी भी ग्राम सभा में गाँवों की संख्या का निर्धारण इस गाँव की कुल जनसंख्या से की जाती है। किसी भी ग्राम सभा के निर्माण हेतु उस गाँव की जनसंख्या कम से कम 1000 अवश्य होनी चाहिए।

वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत का अर्थ है, ग्राम सभा के सदस्यों द्वारा चुने हुए प्रमुख तथा विभिन्न पार्षद द्वारा निर्मित संस्था होती है। ग्राम पंचायत के अंतर्गत एक प्रधान जिसे हम मुखिया भी कहते हैं के साथ साथ कम से कम 9 और अधिक से अधिक 15 अन्य पार्षद सदस्यों का चुनाव उस ग्राम पंचायत क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा किया जाता है। इन सभी प्रतिनिधियों का चुनाव जनता प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से किया जाता है। इन प्रतिनिधियों से मिलकर ग्राम पंचायत का निर्माण होता है।

ग्राम सभा चूँकि किसी ग्राम विशेष के मतदाताओं का समूह होता है अतः यह एक ऐसी संस्था है जो स्थायी रूप से विद्यमान रहती है तथा इसे कभी भी भंग नहीं किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत एक अस्थायी संस्था है जिसका निर्माण प्रत्येक पाँच वर्षों में नए सिरे से किया जाता है।

मुखिया के कार्य एवं अधिकार

अब हम किसी भी ग्राम पंचायत में एक मुखिया के कौन कौन से कार्य तथा अधिकार होते हैं इस विषय पर चर्चा करेंगे। प्रायः एक मुखिया के कार्यों में ही उनके अधिकार भी निहित होते हैं। किसी भी ग्राम पंचायत में एक मुखिया के निम्नलिखित कार्य एवं अधिकार होते हैं –

1. मुखिया का सर्वप्रथम कार्य अपने पंचायत क्षेत्र का विकास करना है।

2. ग्राम पंचायत के विकास हेतु विभिन्न कार्ययोजनाओं का अवलोकन करने तथा उन्हें लागू करना।

3. ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हेतु बैठकों का आयोजन करना तथा उन बैठकों की अध्यक्षता करना।

4. ग्राम पंचायत के विकास कार्यों हेतु उपलब्ध पूँजी कोष पर नज़र रखना तथा उसका अपने पंचायत क्षेत्र के विकास के लिए उचित उपयोग करना।

5. विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों, भूमि संबंधी विभिन्न रिकॉर्डों पर नियंत्रण रखते हुए इनसे संबंधित समस्याओं का समाधान करना।

6. ग्राम पंचायत के विकास हेतु प्रभावशाली योजनाओं का निर्माण करना और उसे उचित रूप से लागू करना जिससे वहां की जनता को इन योजनाओं का अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।

7. ग्राम स्तर पर अपने पंचायत क्षेत्र के सभी ग्रामवासियों के विकास के लिए काम करना तथा जन कल्याण को सुनिश्चित करना। इन कार्यों में जनकल्याण के साथ साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, आपसी भाईचारा, सामाजिक न्याय, महिलाओं, बालिकाओं एवं बच्चों के कल्याण आदि कार्य शामिल हैं।

8. ग्राम पंचायत के विकास कार्यों हेतु बजट का निर्माण करना। 9. विभिन्न योजनाओं के लाभों का आवंटन निष्पक्षता के साथ पूरा करना।

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